मीडिया यानी की देश का चौथा स्तम्भ। इसकी कहाने ऐसी है जो कभी भी बदल सकती है. पिछले ५७ दिनों से चल रहे आरुषि के ड्रामे में मीडिया को जो रोल रहा वो बिल्कुल गैर जिम्मेदाराना रहा. सिर्फ़ एक्स्लूसिव ख़बर के चक्कर में जो खबरें मीडिया ने अपनी मर्जी से दिखाईं उसे भी सीबीआई ने बेगुनाह करार दे दिया. शुक्रवार को जब ये ख़बर सीबीआई के तरफ़ से आयी. बस मीडिया वालों का रंग बदल गया. फिर से एक नयी कहानी सबने शुरू कर दी. चैनलों ने ब्रेकिंग न्यूज़ में दिखाया की आख़िर क्या दोष था एक मासूम पिता का. क्यूँ उसे इतनी बड़ी सज़ा दीगयी. अब इन उल्लू के पाठों को कौन बताये की उस बाप को पुलिस से ज्यादा मीडिया ने कातिल ठहराया था. अपने कार्टून के ज़रिये ये सब दिखाया गया की किस तरह से डॉक्टर तलवार ने पहले अपनी बेटी को मारा इसके तुंरत बाद चाट पर ले जाकर नौकर को मर दिया. तकरीबन दो महीने तक मीडिया इस तरह से डॉक्टर तलवार के पीछे पडी रही और ये भी कहने से नही हिचकी की सीबीआई डॉक्टर को बचने की कोशिश कर रही है. अचानक सारा का सारा माहोल ही बदल गया है. अब डॉक्टर को मीडिया एक प्यार करने वाला पिटा बता रही है जिसकी ज़िंदगी का बस एक मकसद उसकी बेटी थी. एक चैनल ने आरुषि के स्विमिंग पूल के विडियो को दिखाकर उसमे ये संबाद बनने की कोशिश कर रहा था जिसमे डॉक्टर तलवार उस चैनल के अनुसार आरुषि को गहराई में ना जाने को बोल रहे थे. तथा आरुषि उन्हें बोल रही थी नही पापा मुझे तैरना आता है. अब आप ख़ुद अंदाजा लगाइए क्या ये वोही राम की धरती है जहाँ लोग रामराज्य में रहते थे. इन मीडिया वालों पर भी अब कोई कानून होना चाहिए जो इन्हे कुत्तों के तरह व्यवहार करने से रोक सके. नही तो ऐसे ही बेगुनाहों के ये जिंदगियां तबाह करते रहेंगे और इन्हे सरकार भी चौथा स्तम्भ कह कर इन पर कोई लगाम नही लगा पायेगी. अब आप ही सोचिये क्या मीडिया का मतलब कहीं से भी ये होता है. बिना तथ्यों को जांचे परखे प्रस्तुत करना खून करने भी बड़ा गुनाह होता है. ये भारतीय कानून नही बल्कि इंसानियत के कानून के अंतर्गत आता है. वैसे मैं आप को बता दूँ इस पर हमें ही शुरुआत करनी है तभी रामराज्य का सपना साकार हो पायेगा.
अमित द्विवेदी
आरुषि लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
आरुषि लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शनिवार, 12 जुलाई 2008
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)

