
रविवार, 18 अक्टूबर 2009
शनिवार, 17 अक्टूबर 2009
आओ मन का दीप जलाएं

हर रस्ते में दीप जले हैं, हर घर में उजियारा है
क्यों उदास बैठा है प्यारे, मन में क्यों अंधियारा है
यह उत्सव का मौका है, इसको व्यर्थ न जाने दो
निकलो खुश होकर तुम घर से, यह दिन सबसे प्यारा है
लेबल:
मन का दीप
रविवार, 11 अक्टूबर 2009
बुधवार, 7 अक्टूबर 2009
सदस्यता लें
संदेश (Atom)