शनिवार, 15 नवंबर 2008

दिल्ली के रेडलाइट पर भिखारियों की जगह हिजड़े

आजकल दिल्ली केरेड लाइट वाले चौराहों पर एक नया बदलाव देखा जा सकता है। यहां से पारंपरिक भिखारियों की संया अचानक कम हो गई है। उनकी जगह हिजड़ों ने ले ली है। हिजड़ों को आजकल हर रेड लाइट से अच्छी भली रकम मिल जाती है जिसे देखकर ऐसा लग रहा है कि भिख मांगने का काम करवाने वाले आकाओं का यह आइडिया पूरी तरह से सफल हो रहा है।दो महीने पूर्व शनिवार को मैं अंसल प्लाजा केपास से निकलकर नोएडा केलिए रिंग रोड पर आने के लिए रेड लाइट पर खड़ा हुआ तभी मैंने वहां देखा कि कई औरतें साड़ी में खड़ी हैं। पर जब वे मेरे पास आईं तो पता चला कि वो हिजड़ा लोग हैं जो यहां पर लोगोंं से पैसे मांग रहे हैं। मुझे लगा कि सिर्फ ये हिजड़े यहीं केचौराहे पर होंगे। पर बाद में मैंने दो महीने के अपने दिल्ली के विभिन्न इलाकों का भ्रमण करने केबाद ये निष्कर्ष निकाला कि ये हिजड़े तो अब दिल्ली केहर चौराहे पर पहुंच चुके हैं। मैंने इस बारे में दिल्ली केकुछ लोगों से बात करकेये जानने की कोशिश की तो ये पता चला कि ये हिजड़े वास्तव में रेवेन्यू कम हो जाने के कारण यहां पर लाए गए हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि मैं किस रेवेन्यू की बात कर रहा हूं। भाई ये वही रेवेन्यू है जो दिल्ली केसभी चौराहों से भिखारियों द्वारा वसूला जाता है। ये सारा पैसा उनकेआकाओं तक पहुंचकर कई तरफ से बंटता हुआ इन भिखारियोंं को उसका कुछ अंश तनवाह के रूप मे मिलता है। पर पिछले कुछ सालों में लोगों ने भीख देना लगभग बंद सा कर दिया। इससे इस धंधे को काफी नुकसान होने लगा। इस नुकसान की भरपाई केलिए पूरे दिल्ली में लाखोंं हिजड़ों को चौराहोंं पर तैनात किया गया है। ये लोगों केसाथ बत्तमीजी करके कुछ ना कुछ सभी लोगोें से निकलवा ही लेते हैं। लोग इनसे बचने केलिए दस पांच रुपये देकर अपना पिंड छुड़ा लेते हैं। चौराहों पर जो हिजड़े आजकल भीख मांगते नजर आ रहे हैं वास्तव में उनमें से कई लोग सामान्य पुरुष हैं पर पैसा कमाने के लिए उन्होंने यह रूप धरा हुआ है। अब जब आप किसी चौराहे से दिल्ली के निकलें तो इस बदलाव को ध्यान से जरूर देखिएगा। वैसे भी दिल्ली केसभी चौराहों से अब गंदे-गंदे भिखारी कम हो गए हैं तथा शनिदेव केनाम पर उगाही करने वाले भी अब इस धंधे से धीरे-धीरे दूर हो रहे हैं। यह भी हमारेआजाद देश का ही एक रूप है जो आए दिन अपना रंग बदल रहा है। मैनेजमेंट केइस युग में भला भिखारियों का धंधा कब तक नुकसान में चल सकता था। इसलिए भिखारियों केसरादार ने इस धंधे में नई जान फूंक दी और इसे दोबारा मुनाफे में ला दिया।

2 टिप्‍पणियां:

Sachin Malhotra ने कहा…

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अभिषेक जयसवाल ने कहा…

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